स्वंयभू उत्पन्न हुई शिवलिंग दिन में तीन बार बदलती है कलर,पूर्ण होती है हर मनोकामना, चमत्कार जानकर रह जाएंगे हैरान
स्वंयभू उत्पन्न हुई शिवलिंग दिन में तीन बार बदलती है कलर,पूर्ण होती है हर मनोकामना, चमत्कार जानकर रह जाएंगे हैरान
मीडिया रायटर्स रिपोर्ट/हर्षराज सिंह
हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के सकाहा गांव में स्थित श्री शिव संकट हरण मंदिर प्राचीन मंदिर है। यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, जो दिन में तीन बार रंग बदलता है. सुबह भूरा, दोपहर में काला और शाम को सुनहरा हो जाता है। कहते हैं इस शिवलिंग का कोई छोर नहीं है,यह अनंत गहराई तक स्थापित है। गांव के लोग इसे स्वयंभू शिवलिंग बताते हैं. इस शिवलिंग के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. इस शिवलिंग से जुड़ी हुई कई कहानियां आदि और अनादिकाल की हैं।
श्रावण मास में भोलेनाथ के भक्तों के लिए यह मंदिर आस्था का केंद्र रहता है. भक्तगण राजघाट गंगा से गंगा जल लेकर पैदल ही श्री शिव संकट हरण मंदिर पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. कुछ भक्तगणों ने कहा कि दिन के तीन पहर में अलग-अलग जलाभिषेक करने से अलग-अलग मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. भोलेनाथ के भक्त सुधांशु मिश्रा का कहना है कि सुबह यह शिवलिंग भूरे रंग का दिखाई पड़ता है. यह रंग भूत भभूति भोलेनाथ के भोलेपन का परिचायक है.
वहीं दोपहर में यह शिवलिंग काले रंग का प्रतीत होता है. इसे संघारक शिवलिंग की संज्ञा दी जाती है. वहीं शाम को सूर्यास्त के समय यह शिवलिंग सुनहरे रंग में बदल जाता है. यह भक्तों पर दया करने वाले औघड़ दानी की कृपा का परिचायक है. इन तीनों पहरों में अलग-अलग जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का फल भी अलग-अलग ही प्राप्त होता है. सुबह पूजा-अर्चना करने से शिव शंकर मनोवांछित फलों को देते हैं. वहीं दोपहर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से दुष्ट दुश्मनों का संघार करने की शक्तियां प्राप्त होती हैं. वहीं शाम को पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति धनधान्य से परिपूर्ण हो जाता है।