जान जोखिम में डाल कर 6 माह से ग्रामीण पार कर रहे नदी का टूटा पुल; दूसरा रास्ता 16 किलोमीटर दूर, दो हिस्सों में बंटा हरदोई का गनीपुर, प्रशासन नहीं ले रहा सुध
जान जोखिम में डाल कर 6 माह से ग्रामीण पार कर रहे नदी का टूटा पुल; दूसरा रास्ता 16 किलोमीटर दूर, दो हिस्सों में बंटा हरदोई का गनीपुर, प्रशासन नहीं ले रहा सुध
मीडिया रायटर्स रिपोर्ट/राजीव कुमार मिश्र
हरदोई में एक नदी का पुल टूटे होने से 6 महीने से ग्रामीण परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अब तक गर्मियों में कहानी बदस्तूर जारी थी, लेकिन भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है, लिहाज़ा अब यहां से लोगों का गुजरना बेहद कम हो गया है, बच्चो ने स्कूल जाना बंद कर दिया है, वहीं कुछ लोग खेती और जरूरी कामों के लिए आज भी इस पुल से गुजरने को मजबूर है, प्रतिदिन लगभग 200 लोग आज भी इस पुल का इस्तेमाल कर रहे है, ये इलाका 2 पार्ट में बंट गया है, जहां से सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए 16 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता है। प्रशासन ने अभी तक इस मामले को लेकर कोई सुध नहीं ली है।
तहसील बिलग्राम के ग्राम पंचायत रहुला के मजरा गनीपुर में गहा नदी का पिछले छह महीने से टूटा पुल न बनने से ग्रामीणों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों को रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जान जोखिम में डाल कर टूटे पुल से गुजरना पड़ता है। यही नहीं वहां के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में बच्चों की तादाद काफी कम हो गयी है। पानी से लबरेज नदी को पार करना प्राइमरी के बच्चों के बस की बात नही है, जब से नदी पानी से भर गयी है, छोटे बच्चों का स्कूल आना बंद हो गया है।
गनीपुर स्थित प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक गौरव कुमार ने बताया कि पुल टूटने के बाद गनीपुर गांव दो भागो में बंट गया। एक भाग में जूनियर हाईस्कूल हो गया है और दूसरे भाग में प्राइमरी स्कूल शुरुआती दिनों में ग्रामीणों ने नदी में मिट्टी डाल कर एक कच्चा रास्ता बना लिया था, जिसपर से होकर बच्चे इधर से उधर आते-जाते थे, लेकिन जब से नदी में पानी भर गया है बच्चों का आना बंद हो गया। न तो प्राइमरी स्कूल में बच्चे आ पा रहे और न ही जूनियर में यहां से जा पा रहे हैं।
आजीविका चलाने के लिए जान जोखिम में डालनी होगी
गनीपुर के एक किसान विनोद ने बताया कि इस टूटे पुल से रोज सौ से दो सौ आदमियों को मजबूर होकर गुजरना पड़ता है क्योंकि लोगों की खेती पुल के पार पड़ती है अगर आजीविका चलानी है तो जानजोखिम में डालना ही पडेगा नहीं तो खेती में खड़ी फसले बर्बाद हो जायेंगी।